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अमेरिका नहीं, इन देशों में बिकेंगे भारतीय प्रोडक्ट्स... देखते रह गए ट्रंप, भारत ने निकाल लिया टैरिफ का तोड़_我的网站

一 | डिजिटल डेस्क, जम्मू। भारी और लगातार बारिश के कारण तवी नदी में उफान के बाद मंगलवार को जम्मू क्षेत्र में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई, जिससे चौथे तवी पुल के पास सड़क बह गई और पूरे क्षेत्र में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। सोशल मीडिया में इस बाबत एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वाहनों को धंसते हुए देखा जा सकता है।,जम्मू के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) शिव कुमार शर्मा ने जनता से नदियों और नालों के पास जाने से बचने की अपील की है क्योंकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी
जम्मू के डीआईजी ने एएनआई को बताया कि बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी गई है। प्रशासन ने जनता से नदियों और नालों के पास जाने से बचने की अपील की है। राजमार्ग पर यातायात चालू है। हम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठा रहे हैं।",इस बीच, लगातार भारी बारिश ने जम्मू क्षेत्र में तबाही मचा दी और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। केंद्र शासित प्रदेश में लगातार बारिश के कारण अनंतनाग ज़िले में लिद्दर नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जम्मू के गादीगढ़ इलाके में, भारतीय सेना नावों में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार बचाव अभियान चला रही है। इस क्षेत्र में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। चक्की नदी में भारी मिट्टी कटाव और अचानक आई बाढ़ के कारण पठानकोट कैंट से कंदरोरी के केएनडीआई तक डाउन लाइन पीटीकेसी पर यातायात बाधित होने के कारण 18 ट्रेनें रद्द कर दी गईं। जम्मू के कई हिस्सों में भारी बारिश के बाद जम्मू तवी से कटड़ा के एसवीडीके तक, जम्मू तवी से बारी ब्राह्मण से बीबीएनएमएन तक (डाउन लाइन) सेक्शन पर भी यातायात बाधित रहा। अधिकारियों ने बताया कि चार ट्रेनों को बीच में ही रोक दिया गया और बीच में ही शुरू कर दिया गया।,
(समाचार एजेंसी एएनआई इनपुट के साथ)。
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टैरिफ को लेकर जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिका के विकल्प के रूप में भारत कई बाजार तेजी से तैयार करने की कोशिश कर रहा है। ब्रिटेन के बाद अब अगले महीने यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ व्यापार समझौता हो सकता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है और सितंबर में राजनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद इसकी घोषणा की जा सकती है।,वहीं इस साल एक अक्टूबर से यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हो चुके व्यापार समझौते पर अमल शुरू हो जाएगा जिससे यूरोप के चार देश स्विट्जरलैंड, नार्वे, आइसलैंड और लिसटेंस्टिन में भारतीय वस्तुएं बिना शुल्क के या काफी कम शुल्क पर निर्यात हो सकेंगी। ब्रिटेन से भी भारत का व्यापार समझौता हो चुका है और अगले कुछ महीनों में यह समझौता भी अमल में आ जाएगा। इस प्रकार यूरोप के तमाम देशों में भारतीय वस्तुओं का निर्यात बिना शुल्क के हो सकेगा।,ब्रिटेन के साथ ईयू में शामिल फ्रांस, जर्मनी, इटली विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हैं जहां भारतीय निर्यात को काफी प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ हो चुके व्यापार समझौते को भी विस्तार दिया जा रहा है। न्यूजीलैंड से भी भारत व्यापार समझौता कर रहा है। ओमान से भी अगले महीने व्यापार समझौता हो जाएगा। ऐसे में अमेरिका के बाजार में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई आराम से हो सकती है। लेकिन इन व्यापार समझौतों को लागू होने में अभी कुछ माह लगेंगे।,भारतीय निर्यात पर अमेरिका के बाजार में 50 प्रतिशत का शुल्क के जारी रहने पर भारत में विदेशी निवेश का माहौल प्रभावित हो सकता है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है और पिछले कुछ सालों से अमेरिका के बाजार में भारत के निर्यात में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों के साथ कई अन्य देशों की कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू कर दिया था या फिर करने की तैयारी में थी।,विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार के साथ दुनिया के अन्य बाजार को ध्यान में रखते हुए ही निवेश करती है। जानकारों का कहना है कि ताइवान की कई जूता कंपनियां और अमेरिका की खिलौना कंपनियां भारत में निवेश की तैयारी में थी क्योंकि पिछले कुछ सालों से अमेरिका के खरीदार चीन की जगह भारतीय वस्तुओं को खरीदना पसंद कर रहे थे। पिछले तीन सालों में अमेरिका के बाजार में भारत का निर्यात दहाई अंक में बढ़ा है जबकि चीन का निर्यात घटा है। इसे देखते हुए विदेशी कंपनियां भारत में मैन्यूफैक्चरिंग कर अमेरिका व अन्य देशों को निर्यात करना चाह रही थी।,अब 50 प्रतिशत के शुल्क के बाद फिलहाल निवेश के माहौल को धक्का लग सकता है और इस प्रकार के नए निवेश होल्ड पर जा सकते हैं क्योंकि अमेरिका के बाजार में भारत की वस्तुएं चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, इंडोनेशिया के मुकाबले अधिक महंगी हो जाएंगी। दूसरी तरफ भारत को विदेशी निवेश को बढ़ाना है। सूत्रों के मुताबिक इसलिए चीन के निवेश प्रस्ताव पर सरकार नरम रुख रखते हुए उन्हें मंजूरी देने पर विचार कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस माह के अंत में चीन जा रहे हैं जहां दोनों देशों के बीच व्यापार को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत हो सकती है।,
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Published on:02:46:16